उत्तराखंड के ‘सात मोड़’ पर विकास बनाम पर्यावरण की जंग: 4,369 पेड़ों की कटाई के विरोध में उठी नई ‘चिपको’ की आवाज़

उत्तराखंड के भानियावाला–जॉली ग्रांट–ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (NH-7) पर स्थित ‘सात मोड़’ इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच टकराव का केंद्र बन गया है।

₹743 करोड़ की सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हजारों पेड़ों की कटाई का काम शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों, पर्यावरणविदों और छात्र संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी इसे केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के भविष्य पर गंभीर खतरा मान रहे हैं।

परियोजना के तहत लगभग 20 किलोमीटर लंबे मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देहरादून, जॉली ग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच यातायात को सुगम बनाना है।

सरकारी एजेंसियों का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान लगने वाले भारी जाम को कम करने और भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को देखते हुए यह परियोजना आवश्यक है।हालांकि, विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस परियोजना के लिए 4,369 परिपक्व पेड़ों की कटाई और सैकड़ों पेड़ों के स्थानांतरण की अनुमति दी गई है।

उनका दावा है कि यह इलाका हाथियों के महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग और शिवालिक वन क्षेत्र का हिस्सा है, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर गहरा असर पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों से चिपककर कटाई रोकने की कोशिश की और ‘ब्लैक हरेला’ मनाकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और वन विभाग का कहना है कि परियोजना वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों की आवाजाही बनाए रखने के लिए अंडरपास और ईको-कल्वर्ट जैसी संरचनाएं बनाई जाएंगी तथा पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है।

फिलहाल यह विवाद अदालत, प्रशासन और जनता के बीच बहस का विषय बना हुआ है। एक ओर बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी की जरूरत है, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।

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