पट्टियों में लिपटे छात्र से मिले शशि थरूर, बोले-लोकतंत्र में सवाल पूछने पर लाठी नहीं चलनी चाहिए

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी। काले कपड़ों में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल थरूर ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के जख्म और उनकी शिकायतों को करीब से जाना।

मुलाकात के दौरान कई छात्रों ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कथित तौर पर लाठीचार्ज, धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया। सबसे भावुक पल तब आया जब थरूर की मुलाकात एक ऐसे छात्र से हुई, जिसका पूरा चेहरा पट्टियों से ढका हुआ था। छात्र ने बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में वह घायल हो गया।

इसके बाद शशि थरूर ने सरकार की कार्यशैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का जवाब हिंसा से नहीं दिया जाना चाहिए। निष्पक्ष परीक्षा की मांग करने वाले युवाओं को खून से लथपथ और पट्टियों में देखना बेहद दुखद है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

थरूर ने सवाल उठाया कि सरकार ने छात्रों से संवाद करने के बजाय लाठीचार्ज, बैरिकेडिंग और आंसू गैस का रास्ता क्यों चुना। उन्होंने दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और राजधानी के बड़े हिस्से को सुरक्षा घेरे में बदलने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे अनावश्यक डर और तनाव का माहौल बना।

उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग और मेहनतकश परिवारों के लिए निष्पक्ष परीक्षा और मेरिट ही आगे बढ़ने का सबसे बड़ा साधन है। यदि पेपर लीक हों और विरोध करने पर छात्रों पर बल प्रयोग किया जाए, तो पूरी पीढ़ी का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ता है।

शशि थरूर ने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्रों की शिकायतों को सड़क पर टकराव के बजाय संसद के भीतर गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक संवाद शुरू करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की भी मांग की।

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