असम में जुलाई 2026 की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। राहत की बात यह है कि कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, अब भी 6.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, जबकि इस सीजन में 66 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर शिवसागर (2.9 लाख), चराइदेव (1.9 लाख) और जोरहाट (1.3 लाख) जिलों में देखा गया।
डिब्रूगढ़, गोलाघाट, नगांव, लखीमपुर और धेमाजी भी बाढ़ की चपेट में हैं।बाढ़ से 850 से 1700 गांव, 25 हजार से 56 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि, 401 घर पूरी तरह और 1848 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 1.39 लाख से अधिक पशु प्रभावित हुए।
राहत कार्यों में NDRF, SDRF, भारतीय सेना, BSF और स्थानीय प्रशासन जुटे हैं, जबकि 24 हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, नागालैंड में सामान्य से 435–490% अधिक बारिश के कारण डिखौ और धनसिरी नदियां उफान पर आ गईं, जिससे ब्रह्मपुत्र का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
सरकार ने फंसे लोगों तक ड्रोन से राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन पैकेट गिरते ही टूट गए, जिसके बाद फिर नावों के जरिए राहत पहुंचानी पड़ी।बाढ़ का असर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर भी पड़ा, जहां 70–85% क्षेत्र जलमग्न हो गया।
130 से 150 जंगली जानवरों की मौत हुई, जिनमें 6 से 9 एक सींग वाले गैंडे भी शामिल हैं। कई जानवर करबी आंगलोंग की ओर पलायन कर गए, जिसके चलते NH-715 पर वाहनों की रफ्तार सीमित करनी पड़ी। वन विभाग ने करीब 100 वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग अब राहत शिविरों में हैजा, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम पर ध्यान दे रहा है।
हालांकि, विपक्ष, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। नदियों की समय पर सफाई न होना, अवैध खनन, कमजोर तटबंध, खराब शहरी ड्रेनेज और राहत व्यवस्था में देरी को बाढ़ की गंभीरता बढ़ाने वाला कारण बताया जा रहा है। कई गांवों में लोगों ने अधिकारियों का विरोध किया और आरोप लगाया कि राहत सामग्री देर से पहुंची।
वहीं स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों ने केले के तनों की नावें और बांस के अस्थायी पुल बनाकर लोगों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया, जिसने संकट के बीच मानवीय एकजुटता की मिसाल पेश की।
