नेपाल में जन्मे विश्वप्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल ‘निम्स दाई’ पुरजा (MBE) का पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत श्रृंखला स्थित ब्रॉड पीक (8,047 मीटर) पर आए भीषण हिमस्खलन में 43 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 30 जुलाई को कैंप-2 और कैंप-3 के बीच करीब 6,600–7,000 मीटर की ऊंचाई पर 10 सदस्यीय अभियान दल हिमस्खलन की चपेट में आ गया।
कई दिनों तक चले खोज एवं बचाव अभियान के बाद उनकी कंपनी Elite Exped ने उनके और उनके साथियों के निधन की पुष्टि की।निम्स दाई आधुनिक पर्वतारोहण की सबसे प्रेरणादायक हस्तियों में गिने जाते थे। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘Project Possible’ के तहत दुनिया की सभी 14 आठ-हज़ारी चोटियों (8,000 मीटर से अधिक ऊंची) को केवल 6 महीने और 6 दिन में फतह कर इतिहास रच दिया।
इससे पहले यह रिकॉर्ड लगभग आठ वर्षों का था। उनकी इस असाधारण उपलब्धि पर बनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री “14 Peaks: Nothing Is Impossible” ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।सिर्फ रिकॉर्ड ही नहीं, निम्स दाई अपनी बहादुरी और बचाव अभियानों के लिए भी जाने जाते थे। ब्रिटिश गुरखा रेजिमेंट और Special Boat Service (SBS) में 16 वर्ष तक सेवा देने के बाद उन्होंने पर्वतारोहण को अपना जीवन बनाया।
उन्होंने कई बार अपनी ऑक्सीजन तक दूसरों को देकर फंसे पर्वतारोहियों की जान बचाई। वर्ष 2021 में उन्होंने 10 सदस्यीय ऑल-नेपाली टीम का नेतृत्व करते हुए पहली बार सर्दियों में K2 फतह कर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।उनका सबसे प्रसिद्ध संवाद “Giving up is not in the blood, sir!” दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा बन गया।
यह संवाद अन्नपूर्णा पर एक कठिन रेस्क्यू अभियान के दौरान सामने आया था और बाद में उनकी पहचान बन गया।ब्रॉड पीक पर उनका अंतिम मिशन बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सभी 14 आठ-हज़ारी चोटियों को दूसरी बार पूरा करने का था।
अभियान पर रवाना होने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “Broad Peak, I ask for nothing but safe passage up and back down… I take zero mountains for granted.” यह संदेश उनके निधन के बाद लाखों लोगों के लिए बेहद भावुक बन गया।
इस हादसे में निम्स दाई के साथ कई अनुभवी नेपाली शेरपा और विदेशी पर्वतारोहियों की भी जान गई। इनमें कीली पेम्बा शेरपा, नीमा शेरपा, पुर बहादुर गुरूंग, अमेरिकी पर्वतारोही मल्लोरी गीस और ओमान की पर्वतारोही नाधिरा अलहार्थी शामिल हैं।
पाकिस्तान सेना, स्थानीय रेस्क्यू टीमों और वरिष्ठ पर्वतारोहियों ने कई चरणों में अभियान चलाकर शवों को नीचे लाने का प्रयास किया,निम्स दाई ने केवल रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि दुनिया में नेपाली शेरपाओं की पहचान और सम्मान को नई ऊंचाई दी।
उनके निधन पर नेपाल सरकार, ब्रिटेन के शाही परिवार, प्रसिद्ध एडवेंचरर Bear Grylls समेत दुनिया भर के पर्वतारोहियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साहस, अनुशासन और अटूट विश्वास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
