झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और मोराबादी मैदान में हजारों अभ्यर्थी कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन का केंद्र 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप हैं। प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की CID जांच को अस्वीकार करते हुए पिछले सात वर्षों की सभी भर्ती परीक्षाओं की CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करना, JSSC-CGL की निष्पक्ष जांच, संदिग्ध निजी परीक्षा एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करना और OMR शीट में ‘Not Attempted’ का पांचवां विकल्प जोड़ना शामिल है, ताकि बाद में उत्तरों में कथित छेड़छाड़ रोकी जा सके। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया को 6 से 12 महीने के भीतर पूरा करने के लिए समयबद्ध कानून बनाने की भी मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की जांच के लिए विशेष CID जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि कई संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है और पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते के इस्तीफे सहित कई कदम उठाए गए हैं। हालांकि छात्र संगठनों का आरोप है कि राज्य स्तरीय जांच से सच्चाई सामने नहीं आएगी और केवल केंद्रीय एजेंसी की जांच से ही पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकती है।इस आंदोलन को राजनीतिक रंग भी मिल गया है।
भाजपा सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, झामुमो का कहना है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
छात्रों का कहना है कि लगातार परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक और भर्ती में देरी के कारण हजारों अभ्यर्थी 7–10 वर्षों से तैयारी कर रहे हैं और अब कई युवा अधिकतम आयु सीमा भी पार कर चुके हैं। आर्थिक बोझ और भविष्य की अनिश्चितता ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया है।
स्थानीय लोग भी धरनास्थल पर भोजन, बिस्तर और अन्य जरूरी सामान पहुंचाकर छात्रों का समर्थन कर रहे हैं।झारखंड में इससे पहले भी JSSC-CGL, जूनियर इंजीनियर, उत्पाद सिपाही, PGT, लैब असिस्टेंट और JAC बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं। राज्य ने 2023 में कड़ा Anti-Paper Leak Act लागू किया था, जिसमें आजीवन कारावास और ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कानून के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकी हैं।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 6 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा मानसून सत्र के दौरान वे विधानसभा का घेराव करेंगे।
