पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में इतिहास रचते हुए बैंकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज कर ली। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 31 साल पुराने अभेद्य गढ़ को भेदते हुए न केवल अपनी पहली चुनावी जीत हासिल की, बल्कि राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में अपनी मौजूदगी भी मजबूती से दर्ज करा दी।
चुनाव आयोग के अनुसार, प्रशांत किशोर को 63,203 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और BJP उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 44,250 वोट प्राप्त हुए। इस तरह किशोर ने 18,948 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,085 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। उपचुनाव में कुल 34.30 प्रतिशत मतदान हुआ।
बैंकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से BJP का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। 1995 से लगातार इस सीट पर BJP का कब्जा रहा। पहले वरिष्ठ नेता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से विधायक रहे और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट से चुनाव जीतते रहे। नितिन नवीन के BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके कारण उपचुनाव कराया गया।
यह जीत प्रशांत किशोर के लिए इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी नवगठित जन सुराज पार्टी 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।
उस हार के बाद प्रशांत किशोर ने खुद चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया और बैंकीपुर से अपनी राजनीतिक परीक्षा दी। उन्होंने चुनाव प्रचार की शुरुआत अन्य दलों से काफी पहले कर दी थी। लगातार पदयात्राओं, घर-घर जनसंपर्क और बूथ स्तर तक संगठन तैयार करने के जरिए उन्होंने मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाई।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने जाति और धर्म की राजनीति से अलग हटकर पटना के शहरी मुद्दों को केंद्र में रखा। उन्होंने जलभराव, ट्रैफिक जाम, खराब ड्रेनेज व्यवस्था, बेरोजगारी और नागरिक सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इस उपचुनाव को केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार सरकार के कामकाज पर जनता के जनमत संग्रह के रूप में पेश किया।
दूसरी ओर, BJP को चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलने की स्थिति का सामना करना पड़ा। पार्टी के पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा के नाम वापस लेने के बाद अंतिम समय में नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से संगठन के भीतर असमंजस की स्थिति बनी, जिसका असर चुनावी अभियान पर भी पड़ा।इस चुनाव में RJD का प्रदर्शन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और पार्टी तीसरे स्थान पर सिमट गई। इससे यह संकेत मिलता है कि राजधानी पटना के शहरी क्षेत्र में अब जन सुराज पार्टी एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर रही है।
जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि विधायक बनने से बैंकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन आने वाले कुछ महीनों में लोग क्षेत्र में बदलाव महसूस करेंगे। उन्होंने इस जनादेश को जनता के भरोसे की जीत बताते हुए विकास और जवाबदेही की राजनीति का वादा किया। वहीं BJP ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी इस परिणाम की समीक्षा करेगी और संगठनात्मक स्तर पर आत्ममंथन किया जाएगा।
बैंकीपुर उपचुनाव का यह नतीजा सिर्फ एक सीट की जीत-हार नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत माना जा रहा है। 31 वर्षों से BJP के मजबूत गढ़ रहे इस क्षेत्र में प्रशांत किशोर की जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की राजनीति में अब नए समीकरण बन रहे हैं और जन सुराज पार्टी को भविष्य की राजनीति में नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा।
