3 अगस्त 2026 संसद मानसून सत्र: पेपर लीक कानून से लेकर छात्र आंदोलन तक, दिनभर छाए रहे ये बड़े मुद्दे

संसद के मानसून सत्र में 3 अगस्त 2026 का दिन खेल उपलब्धियों, परीक्षा सुधारों और छात्र आंदोलनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के नाम रहा। सदन के भीतर जहां कई अहम विधायी कार्य हुए, वहीं संसद परिसर के बाहर छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बना रहा।

लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत स्पीकर ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल खेल (CWG 2026) में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को बधाई देकर की। उन्होंने गुलवीर सिंह, हरजिंदर कौर, मुरली श्रीशंकर, दिलीप महादू गावित और मोहम्मद बासिल सहित पदक विजेताओं की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाया है।

सदन की सबसे महत्वपूर्ण चर्चा Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर हुई। सरकार ने इसे पेपर लीक रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि संशोधित कानून में दोषियों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल, ₹50 लाख तक का जुर्माना, संगठित परीक्षा माफिया के लिए ₹10 करोड़ तक के जुर्माने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में तय समय सीमा के भीतर सुनवाई का प्रावधान किया गया है। साथ ही दोषी निजी परीक्षा एजेंसियों को 8 वर्षों तक ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

हालांकि विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई समेत कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि 2024 का कानून लागू होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं। विपक्ष ने छात्र आंदोलनों के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की।

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने वॉकआउट भी किया।संसद के बाहर जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर छात्र संगठनों-AISF, AISA, SFI समेत विभिन्न युवा समूहों-ने राष्ट्रीय स्तर की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और निष्पक्ष जांच की मांग की। विपक्ष ने पुलिस की कथित सख्ती और बल प्रयोग का मुद्दा भी संसद में उठाया।

इस दौरान लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई। वहीं राज्यसभा ने MSME Development (Amendment) Bill पारित किया, जिससे छोटे उद्योगों के भुगतान संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे का रास्ता आसान होगा।

इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Bankers’ Books Evidence Bill पेश किया, जबकि Income Tax (Amendment) Bill और Indian Statistical Institute Bill भी सदन में प्रस्तुत किए गए। लोकसभा ने भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर रिपोर्ट देने के लिए अतिरिक्त समय भी प्रदान किया।

दिनभर विपक्ष के हंगामे और छात्र आंदोलन को लेकर लगातार उठे सवालों के कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। इसके बावजूद सरकार ने परीक्षा सुधार और न्यायिक सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य आगे बढ़ाए, जबकि छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहा।

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