भारतीय सेना के 30 वर्षीय अधिकारी मेजर हमज़ा आरिफ की राजस्थान के जैसलमेर सैन्य स्टेशन के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार देर रात उस समय हुआ, जब उनकी SUV अचानक सड़क पर आए एक ऊंट से टकरा गई। इस दुर्घटना ने सेना के साथ-साथ उनके गृह नगर इंदौर को भी गहरे शोक में डुबो दिया।
जानकारी के अनुसार, मेजर हमज़ा अपने दो साथी अधिकारियों लेफ्टिनेंट आयुष्मान गुसाईं और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौड़ के साथ अपनी नई टाटा सफारी SUV से सैन्य स्टेशन लौट रहे थे। रात करीब 12:30 बजे जैसलमेर वॉर म्यूजियम के पास अंधेरे सड़क मार्ग पर अचानक एक ऊंट सामने आ गया।
तेज रफ्तार वाहन ऊंट से टकरा गया, जिससे SUV चार से पांच बार पलटते हुए करीब 100 मीटर तक फिसल गई और सैन्य क्षेत्र की दीवार के पास जाकर रुकी। हादसे में ऊंट की भी मौके पर ही मौत हो गई।
गंभीर रूप से घायल मेजर हमज़ा को तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, दोनों अन्य अधिकारी घायल हो गए और उनका इलाज जारी है। दुर्घटना के बाद सेना, BSF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
मध्य प्रदेश के इंदौर के धनवंतरी नगर निवासी मेजर हमज़ा ने वर्ष 2016 में चमेली देवी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद 2017 में उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की और लगभग नौ वर्षों तक देश की सेवा की।
वे अपने अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।यह हादसा इसलिए भी बेहद भावुक कर देने वाला है क्योंकि मेजर हमज़ा ने कुछ ही सप्ताह पहले अपनी सात साल पुरानी साथी ज्योति अरोड़ा से कोर्ट मैरिज की थी।
दोनों परिवारों की सहमति से दिसंबर में पारंपरिक विवाह समारोह और भव्य रिसेप्शन की तैयारी चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया।मेजर हमज़ा का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर इंदौर लाया गया, जहां हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
सैफी नगर में जनाज़े की नमाज़ अदा की गई, जिसके बाद अंतिम यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए इमली बाजार स्थित दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची। रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और “भारत माता की जय” तथा “मेजर हमज़ा आरिफ अमर रहें” के नारे लगाए।
भारतीय सेना ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम संस्कार के दौरान तिरंगा उनकी पत्नी को सौंपा। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। अंतिम विदाई में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय प्रशासन और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
यह हादसा एक बार फिर रेगिस्तानी इलाकों में अंधेरी सड़कों पर आवारा पशुओं से होने वाले सड़क हादसों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
