कर्नाटक में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। बेंगलुरु, मैसूरु और कलबुर्गी समेत कई शहरों में छात्रों और युवाओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और वर्षों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए और मांग की गई कि या तो एजेंसी में व्यापक सुधार किए जाएं या राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षाएं स्वतंत्र रूप से आयोजित करने का अधिकार दिया जाए। कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, प्रभावित परीक्षाओं का पारदर्शी पुनः आयोजन और छात्रों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डालने की मांग शामिल रही। उनका कहना है कि बार-बार परीक्षा रद्द होने और देरी से खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मैसूरु के रामास्वामी सर्किल और कलबुर्गी के जगत सर्किल में भी छात्र संगठनों ने रैलियां निकालीं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा विवादों से युवाओं का सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हो रहा है। कई छात्र नेताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया लागू करने की भी मांग की।
इसी बीच विजयपुरा के एक परीक्षा केंद्र पर भर्ती परीक्षा के दौरान OMR शीट को लेकर फैली अफवाहों के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी भ्रामक थी। प्राधिकरण ने कहा कि अभ्यर्थियों को केवल प्रश्नपत्र के सीरीज और वर्जन कोड सही तरीके से भरना था और OMR शीट के सीरियल नंबर को प्रश्नपत्र से मिलाना आवश्यक नहीं था। KEA ने छात्रों से अफवाहों पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की।
कर्नाटक सरकार ने भी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कुछ मंत्रियों ने फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की बात कही।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।
