दिल्ली के सत्यानिकेतन में रविवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से राजधानी दहल उठी। करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही यह इमारत छात्रों के लिए Paying Guest यानी PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है, जबकि मलबे से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों को दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत कुछ ही सेकंड में नीचे की ओर भरभराकर गिर गई। स्थानीय लोगों, दिल्ली पुलिस, दमकल और NDRF की टीमों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाने में मुश्किल आई, जिसके चलते शुरुआती दौर में रेस्क्यू कर्मियों और स्थानीय लोगों ने हाथों से मलबा हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत में चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्य को लेकर उठ रहा है। शुरुआती जांच में बेसमेंट में खुदाई और निर्माण गतिविधियों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इमारत में बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और क्या इसे वैध अनुमति के तहत PG के रूप में संचालित किया जा रहा था।
दिल्ली पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इमारत के मालिकों की भूमिका की भी जांच हो रही है। वहीं प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसा केवल निर्माण संबंधी लापरवाही का परिणाम था या इसमें किसी स्तर पर निगरानी और नियामकीय चूक भी हुई।
सत्यानिकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले छात्र निजी PG पर निर्भर रहते हैं। हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन आवासों की नियमित जांच कौन करता है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जो यह तय करेगी कि इस त्रासदी के पीछे आखिर जिम्मेदारी किसकी थी।
