भारत में बढ़ता डायबिटीज संकट: अब छोटे बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा खतरा

भारत में डायबिटीज का संकट तेजी से बढ़ता जा रहा है और अब यह बीमारी केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही बल्कि 10 साल से ऊपर के बच्चों और टीनेजर्स में भी लगातार बढ़ रही है। पहले डायबिटीज को 30 या 40 की उम्र के बाद की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब लाइफस्टाइल बदलने के कारण यह ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है।

आंकड़ों के अनुसार 2020 में बच्चों और टीनेजर्स में डायबिटीज के केस लगभग 1.2 लाख थे, जो 2022 में बढ़कर 2.1 लाख हो गए, 2024 में 3.8 लाख, 2025 में 5.5 लाख और 2026 में 7.2 लाख से भी अधिक पहुंच चुके हैं। यह तेज़ बढ़ोतरी एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों की खराब डाइट है, क्योंकि आजकल माता-पिता बहुत कम उम्र में ही बच्चों को चॉकलेट, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड देना शुरू कर देते हैं, जिनमें हाई लेवल शुगर और आर्टिफिशियल स्वीटनर होते हैं। इसके अलावा फ्रूटी और अन्य पैकेज्ड ड्रिंक्स में भी अत्यधिक स्वीटनर मिलाया जाता है, जिससे शरीर में इंसुलिन लेवल असंतुलित हो जाता है और धीरे-धीरे डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।

लगातार स्क्रीन टाइम, कम फिजिकल एक्टिविटी और बाहर खेलकूद की कमी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कई प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स में शुगर और केमिकल्स का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से अधिक होता है, जिससे बच्चों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए नागरिकों को बच्चों को हेल्दी डाइट, फल-सब्जियां और घर का ताजा खाना देना चाहिए, जबकि सरकार को स्कूलों में हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम, जंक फूड पर सख्त नियम, और पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट शुगर लेबलिंग लागू करनी चाहिए।

यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत में बचप0न से ही डायबिटीज एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन सकती है।

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