भारत की रक्षा शक्ति में ऐतिहासिक छलांग, स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर, मेक इन इंडिया से बदली तस्वीर

भारत का रक्षा क्षेत्र इन दिनों ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) नीति के तहत देश ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीक में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है, ताजा रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन लगभग ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है और पिछले एक दशक की तुलना में यह चार गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाता है।

इस वृद्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां सरकार की “मेक इन इंडिया” और “बाय (इंडियन)” जैसी नीतियों ने घरेलू निर्माण को तेज किया है और विदेशी आयात पर निर्भरता को लगातार कम किया है।

रक्षा क्षेत्र में भारत ने कई स्वदेशी तकनीकों को विकसित किया है, जिनमें तेजस लड़ाकू विमान, HAL प्रचंड हेलीकॉप्टर, C-295 विमान कार्यक्रम, आकाश मिसाइल प्रणाली, पिनाका रॉकेट सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे सिस्टम शामिल हैं, जो अब भारत की सैन्य क्षमता का मजबूत आधार बन चुके हैं, इसके अलावा नौसेना क्षेत्र में भी 90 प्रतिशत से अधिक जहाजों का निर्माण देश के भीतर ही किया जा रहा है, जिससे भारत की समुद्री ताकत को नई दिशा मिली है।

रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने तेजी से प्रगति की है और अब देश 80 से अधिक देशों को हथियार, मिसाइल सिस्टम, रडार और गोला-बारूद का निर्यात कर रहा है, जिससे भारत एक पारंपरिक आयातक देश से बदलकर उभरते वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में सामने आ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सैटेलाइट निगरानी और स्वचालित हथियार प्रणालियों में भारत की बढ़ती क्षमता आने वाले वर्षों में देश को रणनीतिक रूप से और मजबूत बनाएगी, जिससे न केवल रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी और प्रभावशाली होगी।

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