भारत में मौसम को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहां इस साल जून महीने को पिछले सौ वर्षों में सबसे शुष्क जून में से एक बताया जा रहा है, रिपोर्ट्स और मौसम एजेंसियों के शुरुआती आकलन के अनुसार देश में मानसून सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कमजोर दर्ज किया गया है, जिससे कई राज्यों में बारिश की कमी और तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी जा रही है, यह स्थिति खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत और कुछ पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक गंभीर मानी जा रही है जहां समय पर मानसून की सक्रियता अपेक्षित थी लेकिन वर्षा गतिविधियां कमजोर रहीं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की स्थिति के पीछे कई कारक हो सकते हैं, जिनमें समुद्री तापमान में बदलाव, एल-नीनो जैसी वैश्विक जलवायु घटनाएं और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव प्रणाली शामिल हैं, हालांकि अभी आधिकारिक मौसम विभाग द्वारा विस्तृत विश्लेषण जारी किया जाना बाकी है, लेकिन प्रारंभिक संकेत यह बताते हैं कि बारिश के पैटर्न में बड़ा असंतुलन देखने को मिल रहा है।
इस कमजोर मानसून का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है, खासकर उन किसानों पर जो खरीफ फसलों के लिए मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं, धान, मक्का और दालों जैसी फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, वहीं कई राज्यों में जल स्तर गिरने और पेयजल संकट की चिंता भी बढ़ने लगी है।
शहरी क्षेत्रों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है, जहां गर्मी और उमस सामान्य से अधिक बनी हुई है और बिजली की मांग बढ़ रही है, जिससे ऊर्जा प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।मौसम विभाग के अनुसार आने वाले हफ्तों में मानसून की गति में सुधार की संभावना बनी हुई है, लेकिन अगर स्थिति ऐसे ही बनी रही तो यह वर्ष कृषि और जल संसाधनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
