नर्मदापुरम मॉब लिंचिंग केस के फैसले के बाद बवाल, ADJ तबस्सुम खान को धमकियां, सोशल मीडिया पर नफरती कैंपेन से बढ़ा तनाव

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक पुराना मॉब लिंचिंग केस अब नए विवाद और तनाव का कारण बन गया है, जहां 2022 में हुए सिवनी मालवा मामले में आए कोर्ट के फैसले के बाद एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज तबस्सुम खान को लगातार धमकियां और सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है।

यह पूरा मामला अब कानून व्यवस्था के साथ-साथ न्यायपालिका की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है।यह घटना अगस्त 2022 की है, जब सिवनी मालवा क्षेत्र के बाराखत गांव के पास कथित गो-तस्करी के शक में एक ट्रक को भीड़ ने रोक लिया था।

ट्रक में मौजूद तीन लोगों पर भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें नाज़िर अहमद की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि अन्य दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

इस मामले में लगभग चार साल चली सुनवाई के बाद जून 2026 में अदालत ने आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।फैसले के बाद स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। कोर्ट परिसर के बाहर हंगामा हुआ और सोशल मीडिया पर जज तबस्सुम खान को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाते हुए नफरती अभियान शुरू कर दिया गया।

कई वीडियो और पोस्ट में उन्हें अपमानित करने और धमकी देने जैसी बातें सामने आईं, जिनमें हिंसा की चेतावनी तक शामिल थी।मामला बढ़ने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की है और साइबर सेल को जांच सौंपी गई है।

धमकी देने वाले अकाउंट्स की पहचान की जा रही है और जज की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया है।इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित कई कानूनी संगठनों ने इस तरह की धमकियों की कड़ी निंदा की है और न्यायिक फैसलों का सम्मान करने की अपील की है।

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