मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बाराना नदी के किनारे केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में चल रहा 15 दिनों का आदिवासी सत्याग्रह रविवार सुबह प्रशासन की कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया। पन्ना और छतरपुर के आदिवासी परिवार बेहतर पुनर्वास, अधिक मुआवजा और सर्वे से छूटे प्रभावित परिवारों को योजना में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह और फांसी सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक विरोध भी किए। रविवार तड़के करीब पांच बजे भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां धरना स्थल पर लगे टेंट और अस्थायी ढांचे हटाए गए तथा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए उनके गांव भेज दिया गया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर, जो पिछले 14 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे, उन्हें एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश के कारण बाराना नदी का जलस्तर बढ़ गया था, जिससे प्रदर्शन स्थल पर लोगों की सुरक्षा को खतरा था।
वहीं प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बल प्रयोग कर शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म किया और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। विपक्षी नेताओं ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए प्रभावित आदिवासी परिवारों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
इस घटना के बाद केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, पुनर्वास नीति और विस्थापितों के अधिकारों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
