सरकार पर दबाव या वादाखिलाफी? अभिजीत दीपके ने लगाए बड़े आरोप, CJP ने दी आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन स्थगित होने के बाद सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छत्रपति संभाजीनगर लौटने पर उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें सत्ताधारी दल में शामिल होने और चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, ताकि छात्र आंदोलन खत्म किया जा सके। दीपके का आरोप है कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकियां भी मिलीं।

उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग की।इस बीच CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि बिहार और असम समेत कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों के साथ देर रात बैठक हुई।

उनके अनुसार बिहार सरकार की ओर से FIR वापस लेने और हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने संबंधी दस्तावेज सौंपे गए हैं, जबकि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिया गया है। संगठन का कहना है कि किसी भी छात्र को आंदोलन में भाग लेने की वजह से प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि CJP का आरोप है कि कई राज्यों में अब भी छात्रों के घर पुलिस पहुंच रही है और नोटिस जारी किए जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई को हुए समझौते के तहत प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं होनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि लंबित मामलों और जांच प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अभिजीत दीपके, सौरव दास और अशुतोष रांका ने साफ कहा है कि यदि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, घर-घर नोटिस और पूछताछ तुरंत बंद नहीं हुई, तो CJP पूरे देश में फिर से बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगा। संगठन का कहना है कि उनका संघर्ष केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के अधिकार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और न्याय सुनिश्चित करने की लड़ाई है।

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