उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में करोड़ों रुपये की लागत से बना नया पुल उद्घाटन के महज 16–17 दिन बाद ही विवादों में आ गया। नंदा की चौकी (प्रेमनगर) स्थित टोंस नदी पर करीब ₹16 करोड़ की लागत से बनाए गए पुल की एप्रोच रोड भारी बारिश के बाद अचानक धंस गई, जिससे सड़क पर विशाल गड्ढा बन गया और देहरादून–विकासनगर–पांवटा साहिब मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। यह पुल 12 जुलाई 2026 को आम जनता के लिए खोला गया था और इसे पिछले साल बाढ़ में बह गए पुराने पुल की जगह बनाया गया था।
मंगलवार, 28 जुलाई की सुबह हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल की एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश नहीं झेल सकी। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, स्थानीय निवासियों और आपातकालीन सेवाओं को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ा, जबकि सोशल मीडिया पर भी निर्माण गुणवत्ता और सरकारी निगरानी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
घटना के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने स्पष्ट किया कि पुल का मुख्य कंक्रीट ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बारिश के पानी के कारण कटने से सड़क धंस गई। अधिकारियों के अनुसार परियोजना अभी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है, इसलिए निर्माण एजेंसी हिमालयन कंस्ट्रक्शन अपने खर्च पर सड़क की मरम्मत करेगी। साथ ही तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों व इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, जबकि PWD सचिव पंकज कुमार पांडेय ने तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग ने यह भी कहा कि भारी मशीनों की मदद से अस्थायी रूप से सड़क बहाल करने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि जल्द से जल्द यातायात सामान्य हो सके।
इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने घटनास्थल पर धरना देकर सरकार पर भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और जल्दबाजी में परियोजना का उद्घाटन करने के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने इसे “₹16 करोड़, 16 दिन” का मामला बताते हुए लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और जिम्मेदार अधिकारियों व इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जो तय करेगी कि यह केवल प्राकृतिक कारणों का परिणाम था या फिर निर्माण में गंभीर तकनीकी लापरवाही हुई।
