नकली पनीर पर देशभर में शिकंजा, महाराष्ट्र-गुजरात समेत कई राज्यों में कार्रवाई तेज

देश में नकली और एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर खाद्य सुरक्षा एजेंसियों ने सख्ती बढ़ा दी है। महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ऐसे उत्पादों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिन्हें असली डेयरी पनीर की जगह पाम ऑयल, स्टार्च, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया जाता है।

महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और व्यावसायिक इस्तेमाल पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है। राज्य में चलाए गए सैंपलिंग अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पनीर के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद होटल, रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन में इसकी सप्लाई और इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाई गई है।

गुजरात ने भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए एनालॉग पनीर के साथ एनालॉग चीज और बटर पर रोक लगाने की घोषणा की है। वहीं उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी समेत कई शहरों में छापेमारी कर संदिग्ध पनीर, सिंथेटिक दूध और मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त की जा रही है।

खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत अगर कोई व्यावसायिक प्रतिष्ठान असली डेयरी उत्पाद की जगह एनालॉग विकल्प इस्तेमाल करता है, तो ग्राहक को इसकी स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। मेन्यू और ऑनलाइन फूड-डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी इसकी जानकारी दिखानी होगी। नियमों का उल्लंघन कर मिलावटी या गलत नाम से खाद्य पदार्थ बेचने पर कानूनी कार्रवाई और गंभीर मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है।

नकली पनीर के साथ-साथ मिलावटी घी, नकली दूध, मसाले, दोबारा इस्तेमाल किए गए तेल और गलत तरीके से लेबल किए गए पेय पदार्थ भी खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं। FSSAI ने सैंपल जांच, मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन और सप्लाई चेन की निगरानी जैसे कदमों पर भी जोर दिया है।

हालांकि, लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच उपभोक्ता FSSAI की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई अक्सर शिकायत, छापेमारी या वायरल वीडियो के बाद तेज होती है। ऐसे में चुनौती सिर्फ नकली पनीर पकड़ने की नहीं, बल्कि ऐसी मिलावट को बाजार तक पहुंचने से पहले रोकने की है।

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