संसद के मानसून सत्र के 15वें दिन यानी 7 अगस्त को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिली। संसद के बाहर मकर द्वार से लेकर दोनों सदनों के भीतर तक विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष की मांग थी कि अमित शाह सदन में आकर छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, कथित पेलेट गन के इस्तेमाल और हिरासत से जुड़े मामलों पर बयान दें।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद के बाहर कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए और अगर कहीं गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही की मांग दोहराई।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन-सा मंत्री कब सदन में आएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा के सभापति ने अमित शाह की मौजूदगी को लेकर कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं दिया था। लगातार नारेबाजी को लेकर सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
हंगामे के बीच लोकसभा ने MSME Development Amendment Bill, 2026 को करीब 16 मिनट में बिना विस्तृत बहस के पारित कर दिया। बिल में छोटे कारोबारियों को भुगतान में देरी से राहत देने के लिए 90 दिन के भीतर विवाद समाधान, अपील की स्थिति में कम से कम 50% राशि जमा कराने और TReDS के जरिए भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
AAP सांसद राघव चड्ढा ने भी छात्र आंदोलनों और पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि “मेरिट बनाम माफिया” की लड़ाई है और इसका समाधान राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था है।
लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब संसद की कार्यवाही 10 अगस्त को दोबारा शुरू होगी, जहां FCRA Amendment Bill और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।
